भारतातील या मंदिरात होते ‘योनि’ ची पूजा, जाणून घ्या या बद्दल काही रोचक गोष्टी !

2498

भारतातील या मंदिरात होते ‘योनि’ ची पूजा, जाणून घ्या या बद्दल काही रोचक गोष्टी ! भारत को देव भूमि भी कहा जाता है। कारण कि यहां हर गाँव, कस्बे और शहर में ना जाने कितने मंदिर मौजूद हैं। समय के साथ तो इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी ही हुई है। कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जो सदियों पुराने हैं। कुछ ऐसे हैं जो बीते कुछ सालों में बने हैं। हालांकि हर देव स्थान की अपनी एक कहानी है। हर जगह का अपना एक महत्व भी है।

आज हम आपसे ऐसे ही एक स्थान की बात करने वाले हैं। कई मंदिर तो ऐसे भी हैं जो अपने साथ ही अनेक रहस्य समेटे हुए हैं। वहां का पूजा करने का तरीका भी अलग है। ऐसा ही एक मंदिर है, कामाख्या देवी मंदिर। इस मंदिर में स्त्री की योनि की पूजा की जाती है।

हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ समाज में जहाँ महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पूजा-पाठ से दूर रखा जाता है, वहीं इस मंदिर में मासिक धर्म को पवित्रता की दृष्टि से देखा जाता है। तो फिर देर किस बात की है। आइए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातें।

यहाँ स्थित है मंदिरसबसे पुराने शक्तिपीठों में से एक है कामाख्या देवी मंदिर, जो कि गुवाहाटी (असम) से 8 किमी दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है। सभी शक्तिपीठों में कामाख्या शक्तिपीठ को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

योनि की पूजा की वजहइस मंदिर को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव का सती के प्रति मोह भंग करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के मृत शरीर के 51 हिस्से किए थे। ये हिस्से अलग-अलग स्थानों पर जाकर गिरे, यही स्थान आगे चलकर शक्तिपीठ कहलाए। कामाख्या मंदिर वाले स्थान पर मां सती का योनि भाग गिरा था। यही कारण है कि यहां पर योनि की पूजा की जाती है।

आगे जानिये मंदिर से जुड़े तथ्य।

मंदिर में नहीं है देवी की मूर्तिइस मंदिर में देवी की कोई मूर्ति मौजूद नहीं है। यहाँ पर सिर्फ देवी के योनि भाग की ही पूजा की जाती है। इसके लिए मंदिर में एक कुंड जैसा स्थान है, जो हमेशा फूलों से ढंका रहता है। इससे हमेशा प्राकृतिक झरने का जल निकलता रहता है। कहा जाता है कि इस जल को पीकर आप कठिन से कठिन बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं।

भगवान शिव की नववधु के रूप में की जाती है पूजाइस मंदिर के साथ लगे कामदेवी मंदिर में माँ की एक मूर्ती भी विराजित है। ऐसा कहा जाता है कि यहाँ जो भी भक्त अपनी मुराद लेकर आता है, उसकी वो मुराद पूरी हो जाती है।

आगे देखिये मंदिर में तीन दिन के लिए होता है माँ का मासिक धर्म।

हर साल तीन दिन के लिए माता का होता है मासिक धर्महर साल माता का तीन दिनों के लिए मासिक धर्म होता है। इस दौरान मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया जाता है। जब मंदिर खुलता है तो बड़ी संख्या में श्रद्धालू यहाँ पूजा के लिए पहुँचते हैं।

पानी का रंग हो जाता है लालहर साल माता के मासिक धर्म के दौरान तीन दिन के लिए यहाँ ‘अम्बुबाची मेला’ का आयोजन किया जाता है। इस दौरान मंदिर के पास ब्रह्मपुत्र नदी का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है। कहा जाता है कि पानी का यह लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है।

आगे देखिये इस मंदिर के प्रसाद में मिलता है लाल कपड़ा।

प्रसाद में मिलता है लाल रंग का गीला कपड़ाऐसा माना जाता है कि जब माँ को तीन दिन के लिए मासिक धर्म होता है, उस समय सफेद रंग का कपड़ा मंदिर के अंदर बिछा दिया जाता है। तीन दिन के बाद जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं, तब वो कपड़ा माता के रक्त से भीगकर लाल रंग का हो जाता है। इसे भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

मंदिर में दी जाती है बलि, मगर इन जानवरों की नहींइस मंदिर में माँ को प्रसन्न करने के लिए भैंसे और बकरे जैसे जानवरों की बलि दी जाती है, लेकिन यहाँ मादा जानवरों की बलि नहीं दी जाती।

आगे जानिये कामाख्या मंदिर के दो और रोचक तथ्य।

यहाँ होता है काला जादूयह मंदिर तंत्र साधना के लिए भी बहुत मशहूर है। यहाँ पर बड़ी संख्या में साधू और अघोरी देखने को मिल जाते हैं जो काला जादू करने और छुड़वाने का काम भी करते हैं।

कामाख्या के तांत्रिक करते हैं चमत्कारकहा जाता है कि कामाख्या के तांत्रिक और साधू चमत्कार करने में सक्षम होते हैं। इसलिए यहाँ कई लोग विवाह, बच्चे, धन और दूसरी इच्छाओं की पूर्ति के लिए इनके पास आते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि ये तांत्रिक बुरी शक्तियों को भी दूर करने में सक्षम होते हैं।

अगर आपको कामाख्या मंदिर के ये रोचक तथ्य पसंद आए तो इन्हें अपने करीबियों के साथ भी शेयर करें।

Source :- gyanchand.wittyfeed.com

Comments

comments

Loading...